गुरुवार, जून 02, 2011

पाकिस्तानी क्रिकेट में हलचल


पाकिस्तानी क्रिकेट में कब किया हो जाये कहा नहीं जा सकता। कल तक जिस शहीद आफरीदी की टीम में तूती बोलती थी उस के लिए हालात ऐसे बन गए की उसे समय से पहले अंतर्राष्ट्रीए क्रिकेट को अलविदा कहना पड़ा। जी हाँ वही शाहिद आफरीदी जिन्हें कभी गेंदबाजों की धुनाई के लिए जाना जाता था उनकी अब टीम में ऐसी हैसियत हो गयी की उन्हें क्रिकेट को समय से काफी पहले अलविदा कह देना पड़ा। कहा यह जा रहा है बल्कि सच्चाई भी यही है की अफरीदी ने यह कदम इसलिए उठाया की वो बोर्ड दुयारा पाकिस्तान की एक दिवसीय टीम की कप्तानी से हटाए जाने से नाराज थे। पाकिस्तानी क्रिकेट का इतिहास बताता है की यहाँ खिलाड़ियों में न तो कभी आपस में बनी और न ही कभी खिलाड़ी बोर्ड से खुश रहे। इमरान खान और जावेद मियानदाद पाकिस्तानी क्रिकेट की तारीख के दो बड़े स्टार रहे हैं मगर इन दोनों में कभी नहीं बनी। जहां तक बोर्ड का सवाल है तो कोई खिलाड़ी अगर खुश रहा तो बोर्ड से नाराज़ खिलाड़ियों की कमी भी नहीं रही। कुछ खिलाड़ी खुद को बोर्ड से बड़ा भी मानते रहे। इस बार भी कुछ ऐसा ही लग रहा है। आफरीदी के बयान से भी ऐसा ही लग रहा है की वो न सिर्फ बोर्ड की हरकत से नाराज़ हैं बल्कि चाहते हैं की बोर्ड अपनी गलती पर शरिन्दा हो। तभी तो उनहों ने जोर देकर कहा वह तभी वापसी करेंगे जब पीसीबी के 'निम्नस्तरीय' प्रशासक इस्तीफा देंगे।
आफ़र्दी की वापसी होती है या नहीं इसका फैसला हो सकता है की जब आप यह पंक्ति पढ़ रहे हो तो हो जाये मगर उनहों ने सन्यास की घोषणा के समय जो कहा वो यह है 'लोगों ने मुझे काफी सम्मान और प्यार दिया है और मैं इस बोर्ड के साथ काम करके इसे बर्बाद नहीं करना चाहता जिसे यह भी नहीं पता कि खिलाड़ियों का सम्मान कैसे करते हैं।' पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड पर निशाना साधते हुए 31 वर्षीय अफरीदी ने प्रशासकों के मौजूदा समूह को 'निम्नस्तरीय लोग' बताया। इस अनुभवी आलराउंडर ने कहा कि जब तक एजाज बट की अध्यक्षता वाला मौजूदा बोर्ड बरकरार रहेगा तब तक वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेलेंगे। उन्होंने कहा, 'मैं यह साफ करना चाहता हूं कि जब तक मौजूदा बोर्ड रहेगा तब तक मैं अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेलूंगा। जब ये अधिकारी चले जाएंगे और अगर लोग चाहेंगे कि मैं खेलूं तो मैं वापसी पर विचार कर सकता हूं।'
असल में सारी कहानी यह है की आफरीदी इस बात से नाराज़ थे की उन्हें किसी खास कारण के कप्तानी से हटा दिया गया। उनहों ने कहा इस बोर्ड में मेरी कोई कदर नहीं है जिसने मुझे कप्तान के रूप में बर्खास्त करने का ना तो कोई कारण बताया और ना ही मेरा पक्ष सुनने की कोशिश की। मुझे नहीं पता कि उन्होंने किस आधार पर मुझे कप्तानी से बर्खास्त किया। मैंने बिखरी हुई टीम को संवारने में कड़ी मेहनत की और इसे जुझारू टीम में बदला। हम विश्व कप सेमीफाइनल में खेले और इसके बावजूद उन्होंने मेरा पक्ष सुने बिना मुझे बर्खास्त कर दिया।'
मालूम हो की बोर्ड ने वेस्टइंडीज के खिलाफ एक दिवसीय सीरीज में पाकिस्तान की 3-2 की जीत के बावजूद अफरीदी को कप्तान के पद से हटा दिया था। बोर्ड ने उन्हें हटाने का कोई आधिकारिक कारण तो नहीं बताया लेकिन माना जा रहा है कि यह अफरीदी के कोच वकार यूनुस के साथ चयन मुद्दों पर बढ़ते मतभेद का नतीजा था। अफरीदी ने दावा किया कि लाहौर के पंजाब प्रांत का एक समूह है जो हमेशा उनके खिलाफ रहता है। उन्होंने कहा,'यह समूह हमेशा मेरे खिलाफ काम करता है। ये मेरे खिलाफ अध्यक्ष के कान भरते रहते हैं। शायद वे नहीं चाहते कि मैं खेलूं क्योंकि मैं उनकी योजना के आड़े आता हूं।' आफरीदी ने यह भी आरोप लगाया कि कप्तान के रूप में टीमों के चयन के दौरान कभी उनसे सलाह मशविरा नहीं किया जाता। इसके अलावा सीरीज से पहले अंतिम वक्त तक उन्हें सुनिश्चित नहीं होता कि वह कप्तान होंगे।
आइयरलैंड के खिलाफ मैच के लिए कप्तानी से हटाए जाने के बाद अफरीदी टीम से भी हट गए। उन्होंने बोर्ड से कहा कि वह अपने बीमार पिता के साथ समय बिताना चाहते हैं जो अमेरिका में उपचार करा रहे हैं। लेकिन वह अमेरिका से इंग्लैंड पहुंच गए और लंदन से अपने संन्यास लेने की घोषणा की। आफरीदी खुद जो कहें मगर क्रिकेट के जानकार अफरीदी की इस हरकत को उचित नहीं मानते। उनके अनुसार बोर्ड को यह हक़ हासिल है की वो किसे कप्तान बनाए और किसे नहीं आपका काम सिर्फ खेलना है और आपको हर हाल में देश के लिए खेलने को तैयार रहना चाहिए।
इस सिलसिले में पूर्व पाकिस्तानी कप्तान जहीर अब्बास ने कहा, 'मुझे समझ में नहीं आ रहा कि उसे ऐसा करने की क्या जरूरत थी। आज वह बोर्ड को कसूरवार ठहरा रहा है लेकिन वह भूल गया कि आस्ट्रेलिया में गेंद से छेड़छाड़ के विवाद के समय इसी बोर्ड ने उसका साथ दिया था जबकि वह फार्म में भी नहीं था।' उन्होंने कहा, 'टीम जब विश्व कप सेमीफाइनल में पहुंची तो बोर्ड ने उसे पुरस्कार के साथ काफी सम्मान भी दिया।' अब्बास ने कहा कि यदि उसे टीम प्रबंधन से समस्या थी तो उसे बोर्ड अध्यक्ष एजाज बट के सभी पक्षों से मिलकर समस्या का समाधान तलाशने तक इंतजार करना चाहिए था।
पूर्व टेस्ट लेग स्पिनर और पूर्व मुख्य चयनकर्ता अब्दुल कादिर ने भी अफरीदी की संन्यास शब्द का मखौल बनाने के लिए आलोचना की। उन्होंने कहा, 'आजकल संन्यास का ऐलान करना मजाक बन गया है। हमारे खिलाड़ी नियमित तौर पर ऐसा कर रहे हैं जिससे पाकिस्तान क्रिकेट को नुकसान हो रहा है।' पूर्व टेस्ट स्पिनर इकबाल कासिम ने कहा कि अफरीदी के फैसले से पाकिस्तान क्रिकेट को नुकसान ही होगा। वैसे कई ऐसे भी हैं जो आफरीदी के फैसले को उचित ठहराते हैं। ऐसे लोगों का कहना है की जिस कप्तान ने टीम को विश्व कप के सेमी फ़ाइनल में पहुंचाया उसके साथ बोर्ड को ऐसा सुलूक नहीं करना चाहिए।
आफरीदी का यह फैसला उचित है या नहीं इसपर बहस आगे भी चलती रहेगी मगर इतना तो तय है की आफरीदी की गिनती पाकिस्तान के अच्छे क्रिकेटरों में होती थी। हाल ही में आफरीदी की कप्तानी में ही पाकिस्तानी टीम विश्व कप के सेमी फ़ाइनल तक पहुंची। एकदिवसीए क्रिकेट में आफरीदी ने तेज़ बल्लेबाज़ी का एक शानदार नमूना पेश किया। अपने दूसरे ही मैच में उनहों ने सिर्फ 37 गेंदों पर ही शतक ठोंक दिये। यह एकदिवसीए क्रिकेट का आज भी सबसे तेज़ शतक है। शुरू में अपनी तेज़ बल्लेबाज़ी के लिए मशहूर हुये अफरीदी बाद में बेहतर गेंदबाजी भी करने लगे। उन्होंने कुल मिलकर 325 एक दिवसीय मैचों में भाग लिए हैं जिन में 23.49 की औसत से उनहों ने 6,695 रन बनाए हैं । उनका स्ट्राइक रेट 113.82 रहा। एक गेंदबाज के तौर पर उन्होंने 34.22 की औसत से 315 विकेट भी प्राप्त किए। अफरीदी ने 43 ट्वंटी-20 मैच भी खेले हैं जिनमें उनहों ने 683 रन बनाने के अलावा 53 विकेट हासिल किए हैं। अफरीदी को 27 टेस्ट मैच भी खेलने का मौका मिला जिनमें उनहों ने 1,716 रन बनाए और एक गेंबाज़ के तौर पर 48 विकेट हासिल किए। आफरीदी की वापसी होगी या नहीं यह तो पता चल ही जाएगा, अगर उनकी वापसी नहीं होती है तो उनकी तेज़ बल्लेबाज़ी और किसी को आउट करने के बाद उनके खुश होने का एक खास अंदाज़ हमेशा उनकी याद दिलती रहेगी।

1 टिप्पणी:

MONITOR CRI HINDI SECTION ने कहा…

शिब्ली भाई क्या खूब आर्टिकल लिखा है वैसे आफरीदी यह नाटक लगता है । शायद उसकी बोर्ड को ब्लैक मेलिग़ हो।