रविवार, अगस्त 02, 2009

यह कैसी हिंदू मुस्लिम एकता ?

भारत की सब से बड़ी खूबी यह है की यह एकता में अनेकता वाला देश है। बच्चों को किताबों में यही पढाया जाता है की भारत देश की सब से बड़ी खूबी यह है की यहाँ कई धर्मों के लोग एक साथ मिल कर रहते है मगर क्या इमरान हाश्मी के ताज़ा मामले से ऐसा लगता है की यहाँ सभी धर्मों के लोग आपस में मिल कर रहते है। यह सच है की यहाँ ज़्यादा तर लोग ऐसे हैं जो हिंदू मुस्लिम होते हुए भी आपस में खूब मिलकर रहते हैं मगर इस से इंकार नहीं क्या जा सकता की बहुत ऐसे लोग भी हैं जो आपस में मिलकर नहीं रहना चाहते। इमरान हाश्मी के मामले में यह बात सच साबित होती है। ज़रा सोचिये इमरान हाश्मी जैसे हीरो जो की महेश भट्ट के भांजे हैं को मुंबई में सिर्फ़ इसलिए घर नहीं मिल रहा है की वोह मुस्लमान हैं तो फिर छोटे मोटे मुसलमानों को कौन पूछेगा। इमरान हाश्मी से पहले जावेद अख्तर और शबाना आज़मी जैसे स्टारों को भी यही मुश्किल पेश आ चुकी है।
जावेद अख्तर का मामला तो यह है उनके बिना फ़िल्म इंडस्ट्री के बारे में सोचा भी नही जा सकता। यही हाल शबाना आज़मी का भी है। एक और खास बात यह है की जो मुस्लमान पक्के है (पक्के से मतलब जो पाबन्दी से नमाज़ और रोजा रखने वाले हैं ) वोह फ़िल्म स्टारों को पक्का मुस्लमान नही समझते। अब गौर करने वाली बात ये है की जब इन नाव्हने गाने वालों को घर नही मिल रहा है तो बड़ी बड़ी दाढ़ी रखने वाले मुसलमानों को घर मिल सकेगा। सरकार को इस सिलसिले में संजीदगी से गौर कर के उन लोगों के विरूद्व करवाई करनी चाहिए। एक दूसरे से नफरत करने वाले इन लोगों को यह बात क्यों नही समझ में नही आती की वोह ऐसी सोच रख कर देश के विकास में रोकावत बन रहे हैं। देश के पूर्ण विकास के लिए सभी धर्मों के लोगों का मिल कर रहना ज़रूरी है।

4 टिप्‍पणियां:

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" ने कहा…

भई ये सब ड्रामेबाजी ओर पब्लिसिटी हासिल करने की नौटंकी भर है। जितनी सुविधाए इस देश में अल्पसंख्यों को प्राप्त हैं,उतनी दुनिया के किसी ओर देश में देखने को नहीं मिल सकती।
ये सब मीडिया की नजर में आने का एक ढकोसला भर है। जरा समझने का प्रयास कीजिए!!!

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" से पूर्ण सहमत !
यहाँ आम आदमी तो हिन्दू मुसलमानों में कोई फर्क ही नहीं समझता इस तरह के विवादों को जन्म सिर्फ राजनीतिग्य बुद्धिजीवी व कुछ लोग मीडिया में सुर्खियाँ बटोरने के लिए पैदा करते है

Suresh Chiplunkar ने कहा…

काश कि महेश भट्ट ने इतनी हायतौबा, कश्मीर में एक प्लॉट खरीदने के लिये की होती…। आप सलाह देकर देखिये, साँप सूंघ जायेगा :) तमाम बहाने और कानूनी नुक्ते धड़ाधड़ टपक जायेंगे…

ARHAAN ने कहा…

yeh baat sach hai ki aisa hota hai.Parantu kya aise vaakiye muslim bahul ilaakon mein nahin hote.ham sab hindustani hain aur is baat ko lekar badi badi bahas bhi hoti hain lekin iska hal kya hai? kuchh kattarpanthi aur rajneta bhole bhale musalmaano ko apne maayajal mein fansakar apna ullu seedha karte hain.Aur pata tab chalta hai jab woh bechaare lut chuke hote hain.Inhin charampanthiyon ke kaaran duniya mein musalmaanon ka naam kharaab ho raha hai.Aur kisi muslim ko dekhte hi dimaag mein ek aatankvaadi ya dagabaaj ki chhavi banti chali jaati hai.Aisa ho raha hai hamaare media dwara roj muslimon ko gunaahgaar dikhaane ke kaaran,padosi deshon mein faile muslimon ke hitaishi dikhne vaale dushmanon ke kaaran.Abhi bhi waqt hai khud kuchh kar dikhaane ka.sambhal jaao aise chaalbaajon ki saajishon se.Yeh baat nahin hai ki sabhi muslim aatankvaadi hain balki aatankvaad ka koi majhab ya koi dharm nahin hota na hi woh kisi ka rishtedaar hota haiuska dharm aatank aur uska imaan aatank hota hai.shesh........