गुरुवार, दिसंबर 17, 2009

धंधा है पर गन्दा है.

गत दिनों सुप्रीम कोर्ट की एक ऐसी दलील आई जिसे भारतीय समाज में आसानी से स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि दुनिया के सब से पुराने धंधे वैश्यावृति पर अगर कानून बनाकर या फिर किसी और तरीके से रोक लगाना मुमकिन नहीं हो रहा है तो फिर इसे कानूनी दर्जा ही क्यों न दे दिया जाये। कोर्ट कि यह टिपण्णी बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। इस सच्चाई से इंकार नहीं किया जा सकता कि हर तरह कि कोशिश के बावजूद इस बुराई पर काबू नहीं पाया जा सका है। अलबत्ता इस के अंदाज़ में भी तब्दीली आ गयी है। कुछ साल पहले तक यह गन्दा धंधा चोरी छुपे होता था मगर अब यह खुले आम हो रहा है। पहले दलाल लोगों को वेश्या के पास लाते थे अब बिंदास टाइप कि लड़कियां काल गर्ल का काम कर रही है और इस धंधे में वोह किसी दलाल के चक्कर में पड़ने के बजाये खुद ही अपना नंबर बाँट रही हैं और घंटों में लाखों पैसा कमा रही हैं। जी हाँ अंग्रेज़ी अखबार में मसाज सेण्टर के नाम पर जो विज्ञापन छपता है वोह असल में काल गर्ल का ही नंबर होता है। इन में कुछ तो दलाल के नंबर होते हैं और कुछ पर आप सीधा काल गर्ल से ही बात कर सकते हैं। इन काल गर्ल के चार्ज अलग अलग होते हैं। इन से होटल में संपर्क करें तो उसका चार्ज अलग होगा इन्हें आप जहाँ चाहें ले जायें उसका चार्ज अलग होगा। ऐसी लड़कियां भी हैं जो एक साथ कई लोगों के साथ जाने को तैयार हैं बस आपको उसका रेट देना होगा। कुल मिला कर दुनिया के दुसरे देशों कि तरह भारत में भी वैश्यावृति किसी न किसी शक्ल में मौजूद है।
अब सवाल यह है कि क्या यदि यह बुराई बड़े पैमाने पर हो रही है और इस पर रोक भी नहीं लग पा रहा है तो क्या इसे जायज़ करार दिया जाना उचित होगा। भारत जैसे देश में इसका सीधा सा जवाब यह है कि इस बुराई को किसी भी तरह से जायज़ नहीं ठाहराया जा सकता। इस से इनकार नहीं किया जा सकता कि बुराई भारत के छोटे बड़े हर शहर में मौजूद है। ग़रीब से ग़रीब और अमीर से अमीर लड़कियां इस बुराई में लिप्त हैं। मगर इस का मतलब यह नहीं है कि यदि बुराई बड़े पैमाने पर हो रही है तो उसे बुराई नहीं मन जाये। यदि इस बुराई को जायज़ ठाहराया जाता है तो इस का समाज पर बहुत बुडा असर पड़ेगा। जो वैश्याएँ या काल गर्ल आज कुछ हद तक शर्माती हैं वह फिर खुलेआम अपने ग्राहक से बदतमीजी करती नज़र आयेंगे। कुल मिलकर वैश्यावृति चाहे कितनी ही पुरानी तिजारत क्यों न हो यह एक बहुत बड़ी बुराई है और इसे भारतीय समाज में उचित नहीं ठाहराया जा सकता।

1 टिप्पणी:

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

आपके विचारो से सहमत हूँ.....